**भाग नौ: शिकवे और आँसू**उस विशाल गलियारे में, पल्लवी के कमरे का वह भारी ओक का दरवाज़ा किसी ठोस ...
पंजाब की सुनहरी धूप में चमकते वो पाँच एकड़ के खेत अब विक्रम की मलकियत नहीं रहे थे। आज ...
**भाग आठ: एक बाप की चेतावनी**कबीर अभी उस आलीशान ड्रॉइंग रूम के बीचों-बीच खड़ा ही था कि हवेली का ...
आँगन के उस कोने में आज भी वह रूहानी खामोशी महसूस होती है, जहाँ कभी चिंकी और चीकू की ...
**भाग सात: हवेली की चौखट पर**दरवाज़े पर पड़ने वाली वो ज़ोरदार दस्तक और पल्लवी के माता-पिता की वो घबराई ...
मिट्टी में ज़हर घोलकर, कैसा स्वाद ढूंढते हो, बीमारियों की फसल बोकर, फौलाद ढूंढते हो। डाइनिंग टेबल पर माहौल ...
**भाग छ: टूटे ख़्वाब, बिखरी दुनिया**कमरे के उस घुटन भरे सन्नाटे को पीछे छोड़कर कबीर बाहर उस तेज़ बारिश ...
घर में मेहमानों का ताँता लगा हुआ था और रसोई की पूरी कमान पड़ोस की ताईजी के हाथों में ...
**भाग पांच: हक़ीक़त की दीवार**कमरे में एक भारी खामोशी पसरी हुई थी, जिसे सिर्फ बाहर गिरती बारिश की बौछारें ...
*लकी गलियों में अपनी दरियादिली और याराना मिजाज के लिए जाना जाता था, पर यही खूबी एक दिन उसके ...