समय अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता गया। देखते ही देखते कुछ साल बीत गए। अग्निहोत्री हाउस एक बार फिर ...
बिजली की चमक हवेली की पुरानी दीवारों पर पड़ती है।दरवाज़ा ज़ोर से खुलता है — करन अपनी बाँहों में ...
ऑफिस के केबिन के बाहर काँच की दीवार के पीछे खड़ा वह साया धीरे-धीरे आगे बढ़ा। वह कोई और ...
(कमरे में घना अंधेरा है। टूटी हुई मोमबत्तियाँ, खून के छींटे और सन्नाटा। अचानक करन की उंगलियाँ हल्की-हल्की हिलती ...
अदालत का वह दिन इतिहास में दर्ज हो गया। शहर की सबसे बड़ी अदालत में खचाखच भीड़ थी। मीडिया ...
रात काफी गहरी हो चुकी थी…घड़ी में लगभग 1 बज रहे थे…कमरे में हल्की सी night lamp की रोशनी ...
छत पर ठंडी हवा चल रही थी। दूर आसमान में चाँद बादलों के बीच छिपता-निकलता दिखाई दे रहा था। ...
हल्की धूप कमरे में फैल रही है। बाहर से नल का पानी गिरने की आवाज़ आ रही है। करन ...
कुछ हफ्ते बीत चुके थे। पहाड़ियों की ठंडी हवा और डॉ. आर्यन की नियमित थेरेपी ने संयोगिता के चेहरे ...
कुछ खूबसूरत दिन पहाड़ों में बिताने के बाद रितांश और सिद्धिदात्री आखिरकार घर लौट आए। सुबह की हल्की धूप ...