रात गहरी हो चुकी थी। अग्निहोत्री हाउस में शादी की सारी रस्में पूरी हो चुकी थीं। पूरा घर थकान ...
समय बीतता गया…लेकिन उस फैसले का असर हर दिन गहरा होता गया…शिवांशी अब 5 साल की हो चुकी थी…उसकी ...
पार्टी पूरे जोश में चल रही थी। संगीत बज रहा था और ऑफिस के कर्मचारी डांस फ्लोर पर आकर ...
सुबह का समय — हवा में धुंध, जंगल के पेड़ों के बीच से सूरज की किरणें छनकर आ रही ...
अगली सुबह ऑफिस में सब कुछ सामान्य लग रहा था। शैलजा चुपचाप अपनी सीट पर बैठी थी। वो कल ...
सुबह हो चुकी थी…खिड़की से आती धूप कमरे में फैलरही थी…लेकिन उस रोशनी में भी एक अजीब-सी उदासी थी। ...
मंदिर का अंदरूनी हिस्सा—धीमी अब्बर-लाल रोशनी, अगरबत्तियों की खुशबू हवा में फैली है। दीवारों पर भैरव की मूर्ति अर्ध-छायाँ ...
रविवार की शाम संयोगिता के घर में काफी चहल-पहल थी।उसके माता-पिता ने घर को अच्छी तरह से सजा रखा ...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आई तो शैलजा की आँख खुली। रात की घटनाएँ उसे सपने ...
रात बीत चुकी थी...लेकिन राधा के लिए सब कुछ बदल चुका था।वह अपने कमरे में बैठी थी। सामने आईना ...