प्लीज़… बस आप एक काम कर दीजिए… कान्हा के कान पर रिसीवर रख दीजिए… आप सुन रहे हैं ना?”महक ...
अगले कुछ दिनों तक महक ने खुद को रोज़मर्रा के कामों में उलझाए रखा।पर जितनी कोशिश करती, उतनी ही ...
14 नवंबर की सुबह थी।घर में रौनक थी... चहल-पहल थी... और एक खास चमक — जैसे सच में लक्ष्मी ...
नियति का मोड़शहनाइयाँ बज रही थीं।मंडप में अग्नि जल रही थी।फूलों की खुशबू और हवन की धूप के बीच, ...
नवंबर की हल्की ठंड...और मीठी-सी धूप में...आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही ...