अगली सुबह जब शहर की गलियों में लोग अपने काम के लिए निकल रहे थे, भूपेंद्र अपनी मर्यादा और ...
बिस्तर पर अब सिर्फ वासना का खेल चरम पर था। भूपेंद्र ने काया के दोनों हाथों को अपने एक ...
जिम के काम निपटाने के बाद वंशिका भारी मन से शबनम के बताए पते पर पहुँची। यह शहर की ...
करीब एक घंटे बाद, जब मनोरमा और वंशिका की बहस थककर शांत हुई, तो घर में एक भारी सन्नाटा ...
हॉल में बिखरी बेशर्मी की गूँज ने वंशिका के भीतर के धैर्य को राख कर दिया था। वह कमरे ...
वंशिका ने एक नई रणनीति अपनाई। उसने घर पर रुकना कम कर दिया और अपना ज़्यादा से ज़्यादा समय ...
वंशिका जानती थी कि लोग कहेंगे—"मर्द तो मासूम होता है, वह तो फिसल गया, औरत ने ही उसे संभाला ...
वंशिका अपने अंधेरे कमरे में अकेले बैठी थी। पंखे की आवाज़ उसे किसी पुराने जख्म को कुरेदने जैसी लग ...
शाम ढलते ही जब भूपेंद्र और काया घर लौटे, तो घर की हवा में एक अजीब सी भारीपन थी। ...
आधी रात के उस सन्नाटे में, जब भूपेंद्र और काया एक-दूसरे के वजूद में खोए हुए थे, अचानक पास ...