अध्याय 9: आख़िरी सफ़रअस्पताल की खिड़की के बाहर बारिश हो रही थी।अंगद ICU के बाहर खड़ा था।काँच के उस ...
अध्याय 8: कोमा के भीतरधड़… धड़… धड़…ट्रेन के पहियों की आवाज़ अंधेरे अस्पताल में गूँज रही थी।अंगद बिल्कुल स्थिर ...
अध्याय 7: दस साल की नींदट्रेन चल रही थी।लेकिन अंगद के लिए समय रुक चुका था।वह अपनी सीट पर ...
अध्याय 6: वह रातउस रात अंगद घर नहीं गया।वह स्टेशन के बाहर लगी एक लोहे की बेंच पर बैठा ...
अध्याय 5: दस साल पुरानी रातकागज़ अब भी अंगद की उँगलियों के बीच था।16 अगस्त 2016।वही तारीख।दस साल पुरानी।उसने ...
अध्याय 4: समय के खिलाफअंगद की आँखें खुली थीं।लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।डिब्बे की पीली रोशनी ...
---Chapter 3: फँसा हुआरात के 11:51।---प्लेटफ़ॉर्म पर वही हल्की गूंज।Announcements दूर से आ रही थीं…पर साफ नहीं।जैसे कोई आवाज़ ...
Chapter 2: वही रात… फिर सेरात के 11:52।घड़ी की सुई जैसे अटक गई हो।---प्लेटफ़ॉर्म पर ट्यूब लाइट झपक रही ...
Chapter 1: आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के ...
Chapter 10 — भारमाली और बागा का अंतआशानंद अब बागा और भारमाली के पास ही रहने लगे थे।राजमहल की ...