CHIRANJIT TEWARY stories download free PDF

तेरे मेरे दरमियान - 112

by CHIRANJIT TEWARY
  • 471

रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 81

by CHIRANJIT TEWARY
  • 132

निलु के मन मे कुम्भन का डर सता रहा था । इसिलिए वो अपना हाथ के रस्सी को जल्दी ...

तेरे मेरे दरमियान - 111

by CHIRANJIT TEWARY
  • (4.7/5)
  • 735

रश्मी :- पर इन दो सालो मे क्या हमारी एक बार भी याद नही आई ..?आदित्य :- आई ... ...

तेरे मेरे दरमियान - 110

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.5k

जानवी (आँखों में आँसू): - तो तुमने… सच में कभी मुझे छोड़ा ही नहीं आदित्य… सब मेरी गलती है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 80

by CHIRANJIT TEWARY
  • 960

कुंम्भन जौर जौर से हंसते हुए कहता है।" मृत्यु की तुम परिचय मांग रहे हो मुर्ख । आज तेराअंतिम ...

तेरे मेरे दरमियान - 109

by CHIRANJIT TEWARY
  • (4.9/5)
  • 1.3k

अशोक उसे कहना तो बहुत कुछ चाहता था , अशोक अपनी बेटी की हालत कहना चाहता था पर आदित्य ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 79

by CHIRANJIT TEWARY
  • 809

निलु की बात सुनकर कुंम्भन गरजते हूए कहता है।हे मुर्ख मानव । कदाचित मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है ...

तेरे मेरे दरमियान - 108

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.2k

अनय :- अरे शमिका ये तुमसे झुट बोला है , ये मेरे कंपनी का मामुली सा एम्पलाई है , ...

तेरे मेरे दरमियान - 107

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.8k

उसकी आँखों से आँसू लगातार बहने लगते हैं। उधर आदित्य भी जानवी को देखकर कुछ पल के लिए खो ...

तेरे मेरे दरमियान - 106

by CHIRANJIT TEWARY
  • (5/5)
  • 1.5k

उसकी आँखें नम हो जाती हैं और फिर आदित्य अपने आंखे चुराते हूए कहता है --आदित्य (धीरे): - बस… ...